ऋषिकेश : जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का अचानक निरीक्षण कर कई गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया। कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्था पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण में पाया गया कि सब-रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में लिपिक अवैध रूप से विलेखों का पंजीकरण कर रहे थे।
डीएम ने लिपिक से पूछा, “आपको संपत्ति मूल्यांकन (47-ए) का ज्ञान ही नहीं, तो स्टांप शुल्क कैसे पास किया?” औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंडों को छोटे टुकड़ों में बांटकर कई रजिस्ट्री करने से करोड़ों की स्टांप चोरी का मामला सामने आया। विस्तृत जांच के लिए रिपोर्ट मांगी गई। कार्यालय की अलमारियों में सैकड़ों मूल विलेख धूल खाते मिले, जो महीनों से लंबित थे।
नियम के अनुसार इन्हें तीन दिनों में लौटाना होता है, लेकिन आवेदक परेशान हो रहे थे। रजिस्ट्री की नकलें भी 24 घंटे के बजाय महीनों-वर्षों से अटकी हुईं। निरीक्षण के दौरान एक ‘घोस्ट कर्मचारी’ भी पकड़ा गया—न नियुक्ति पत्र, न उपस्थिति रजिस्टर में नाम। डीएम ने सभी कर्मचारियों का रिकॉर्ड तलब कर लिया। पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई—कई ने बयान दर्ज कराए।
डीएम ने संदिग्ध कंप्यूटर, लंबित मूल दस्तावेज और कूटरचित विलेख जब्त कर तहसील प्रशासन को सौंप दिए। कार्यालय सुबह 9:30 खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री 11:15 पर हुई, पुराना डेटाबेस चल रहा था और शुल्क संग्रह की व्यवस्था भी गड़बड़ थी। डीएम ने कहा, “जनहित के मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। दोषियों पर अपराधिक कार्रवाई होगी।” उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह आदि मौजूद रहे।
