देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री के ताज़ा बयान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह संवेदना नहीं, बल्कि तीन साल से टाली जा रही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि अंकिता प्रकरण में उर्मिला सनावर द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासे हुए लगभग 15–20 दिन हो चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने अब जाकर बयान दिया। उनके मुताबिक, यह देरी बताती है कि “उत्तराखंड की देवतुल्य जनता और राज्य की बेटियों के लिए सरकार की प्राथमिकता क्या है।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के इस कथन—“हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं”—पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि सरकार शुरू से जांच के लिए तैयार थी तो फिर पिछले तीन वर्षों में CBI जांच से परहेज क्यों किया गया। उन्होंने पूछा, “अगर सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं था तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच से डर क्यों लगा?” गोदियाल ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी आपत्ति दर्ज की, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे और “जो वे आदेश करेंगे, वही सरकार करेगी।”
इसे उन्होंने संविधान और कानून की व्यवस्था के विपरीत बताते हुए कहा, “जांच माता-पिता के आदेश से नहीं, कानून के प्रावधानों से चलती है। मुख्यमंत्री का कर्तव्य निर्णय लेना है, जिम्मेदारी जनता पर या पीड़ित परिवार पर ढकेलना नहीं।” उन्होंने सवाल किया कि क्या अब तक राज्य सरकार की कोई स्वतंत्र सोच और स्पष्ट नीति नहीं थी, और क्या तीन साल तक सरकार केवल घटनाक्रम को टालने की रणनीति पर ही चलती रही। गोदियाल ने मुख्यमंत्री के कथन—“जो कानूनी रूप से संभव होगा, वही किया जाएगा”—पर पलटवार करते हुए पूछा, “CBI जांच में कौन-सा कानून बाधा बन रहा है? और हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच करवाना किस प्रावधान के खिलाफ है?”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि सरकार अब जनता के दबाव, “अंकिता भंडारी को न्याय दो” पदयात्रा और लगातार सामने आ रही नई जानकारियों के कारण रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है। “जनता का आक्रोश, सच सामने आने का डर और पदयात्रा की बढ़ती जनभागीदारी—इन तीनों ने सरकार को मजबूरी में बयान देने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन केवल बयानबाजी से न्याय नहीं मिलता,” उन्होंने कहा। गोदियाल ने आरोप लगाया कि घटना के बाद रिसॉर्ट को तोड़ा गया, पुलिस कस्टडी में दो बार आग लगने की घटनाएं हुईं और महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किए गए।
“तीन साल बाद मुख्यमंत्री यह कह रहे हैं कि ‘जांच कराएंगे’, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि अब तक किसका संरक्षण किया जा रहा था?” उन्होंने पूछा। प्रदेश कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी पूर्व मांग दोहराते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच CBI को सौंपी जाए, इसकी निगरानी हाईकोर्ट के सिटिंग जज द्वारा कराई जाए, कथित VIP की पहचान सार्वजनिक की जाए और सबूत मिटाने में शामिल सभी व्यक्तियों व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटी है, और “बेटी को न्याय दिलाने के मुद्दे पर कांग्रेस किसी भी तरह की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।” उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि यदि वे वास्तव में गंभीर हैं, तो “घोषणाओं के बजाय आज ही कैबिनेट से ठोस निर्णय करवाएं, क्योंकि न्याय आदेश से होता है, भाषणों से नहीं।”
