“उसके हाथ में किताब थी, कंधों पर परिवार की उम्मीदें… और जेब में सिर्फ़ ₹10,000 की नौकरी” डिग्रियां हाथ में, रोजगार की आस में युवा परेशान — आखिर पढ़ाई का मूल्य क्या रह गया?
आवाज़ें दबाई जा सकती हैं, मिटाई नहीं जातीं; सवाल टाले जा सकते हैं, लेकिन हमेशा के लिए भुलाए नहीं जाते।”
25 जुलाई तक हर हाल में पूरी हों कांवड़ मेले की तैयारियां, लापरवाही पर होगी कार्रवाई : डीएम
मानवता की मिसाल बना श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, लाल पुल बस हादसे के घायलों का किया निःशुल्क उपचार
मानसून से पहले धुंध, बंद की गई केदारनाथ हेली सेवा –
