September 19, 2026

1 thought on ““उसके हाथ में किताब थी, कंधों पर परिवार की उम्मीदें… और जेब में सिर्फ़ ₹10,000 की नौकरी” डिग्रियां हाथ में, रोजगार की आस में युवा परेशान — आखिर पढ़ाई का मूल्य क्या रह गया?

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