आईएसबीटी के रोज़मर्रा के शोर-शराबे के बीच किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक सुबह हालात बदलने वाले हैं। दुकानों के सामने खड़े वाहन, बंद पड़ा निकासी गेट और जगह-जगह फैला अतिक्रमण — जैसे सब कुछ रोज़ जैसा ही था। मगर उस दिन हर चीज़ अचानक ठहर गई।.

जिलाधिकारी सविन बंसल खुद आईएसबीटी पहुँच गए।
बिना किसी औपचारिकता के, सीधे मैदान में।
किसी को भनक तक नहीं लगी — न कोई पूर्व सूचना, न तामझाम।
जहाँ निकासी गेट महीनों से बंद था, वहीं डीएम ने रुककर पूछा—
“यहाँ से लोग कैसे निकलते होंगे?”
अधिकारियों की नज़रें झुक गईं।
उन्होंने तुरंत मौके पर ही निर्देश दिए—
“गेट तुरंत खुलवाइए। मरम्मत शुरू कीजिए। यात्रियों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।”
फिर नज़रे पार्किंग पर गईं।
फ्लाईओवर के नीचे अव्यवस्थित खड़ी गाड़ियों को देखकर उन्होंने सख्त लहजे में कहा—
“यहाँ सुव्यवस्थित पार्किंग बनेगी — कलर-कोड के साथ। लोग आएँ, और सुविधा महसूस करें।”
सड़क किनारे फैले अतिक्रमण पर जिलाधिकारी का रुख और तेज़ हो गया।

स्पष्ट आदेश —
“अतिक्रमण हटाइए। लेकिन आम लोगों को तकलीफ़ न हो — यह ध्यान रहे।”
निरीक्षण खत्म हुआ — और जैसे किसी ने बटन दबा दिया हो।
निकासी गेट खुला — मरम्मत शुरू
टाइल बिछाकर नई पार्किंग बननी शुरू
क्रॉसओवर निर्माण का काम आगे बढ़ा
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार
फ्लाईओवर के नीचे आधुनिक, रंग-कोडेड पार्किंग विकसित होने लगी
अब आईएसबीटी की तस्वीर बदलने लगी है।
यात्री राहत महसूस कर रहे हैं —
वाहन व्यवस्थित खड़े होते दिख रहे हैं —
और सबसे बड़ी बात — प्रशासन की मौजूदगी महसूस हो रही है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने साफ कहा—
“काम समय पर, गुणवत्ता के साथ पूरा हो —
और यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।”
जिला प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि आईएसबीटी सिर्फ बस स्टेशन न रहे —
बल्कि सुव्यवस्थित, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल मॉडल टर्मिनल बन सके।
