जरूरतमंदों के लिए सहारा बने डीएम बंसल , दो परिवारों को 2 लाख की बड़ी राहत, सहारा मिलते ही खुशी से झलके आंशु
गोविन्द शर्मा (पत्रकार )
जिंदगी कभी-कभी ऐसी परीक्षा लेती है, जहां इंसान के सामने हर रास्ता बंद नजर आता है। लेकिन ऐसे ही मुश्किल समय में अगर कोई सहारा मिल जाए, तो टूटती उम्मीदों में भी नई रोशनी दिखाई देने लगती है। देहरादून में दो जरूरतमंद महिलाओं के लिए जिला प्रशासन ऐसा ही सहारा बनकर सामने आया।
सुद्दोवाला की रहने वाली मीना ठाकुर की जिंदगी पिछले आठ वर्षों से संघर्ष की कहानी बन गई थी। उनके पति अचानक लापता हो गए और फिर कभी लौटकर नहीं आए। समय बीतता गया, लेकिन उनकी कोई खबर नहीं मिली।
घर में पांच बच्चों की जिम्मेदारी, जिनमें दो बेटियां दिव्यांग, ऐसे में परिवार का पूरा बोझ अकेले मीना ठाकुर के कंधों पर आ गया। किराये के मकान में रहकर वह जैसे-तैसे बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना उनके लिए दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा था।
जब हालात और ज्यादा कठिन हो गए, तो मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा सुनाई। उनकी कहानी सुनकर जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए CSR फंड से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी।
इसी तरह खुड़बुड़ा क्षेत्र की अमृता जोशी की जिंदगी भी मुश्किलों से भरी हुई थी। पति से अलग रहने के बाद वह दूसरों के घरों में काम कर अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं।
उनका बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रसित है, जिसके इलाज में लगातार खर्च हो रहा था। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि छोटे बेटे की फीस जमा न होने के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया। वहीं किराया न चुका पाने पर मकान मालिक ने भी उन्हें घर से बाहर कर दिया।
ऐसे कठिन समय में अमृता जोशी ने भी जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाई। उनकी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने मानवीय पहल करते हुए CSR फंड से 1 लाख रुपये की सहायता उनके बैंक खाते में भेज दी।
इस मदद से अब अमृता अपने बेटे का इलाज करा सकेंगी, छोटे बेटे की पढ़ाई दोबारा शुरू करा पाएंगी और परिवार के लिए एक नई शुरुआत कर सकेंगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दोनों परिवारों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जाए। साथ ही मीना ठाकुर की बेटियों की पढ़ाई को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के माध्यम से आगे बढ़ाने और दिव्यांग बेटियों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिलाधिकारी की इस पहल की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों ने कहा कि जरूरत के समय प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम न सिर्फ इन परिवारों के लिए राहत है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि कठिन परिस्थितियों में प्रशासन लोगों के साथ खड़ा है। लोगों ने जिलाधिकारी का धन्यवाद व्यक्त करते हुए इस मानवीय पहल की प्रशंसा की है।
