देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में धामी सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर न्याय की लड़ाई को राजनीति कहा जा रहा है, तो कांग्रेस ऐसी राजनीति रोज सड़क से विधानसभा तक लड़ती रहेगी। उन्होंने भाजपा के “राजनीतिकरण” के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार के नैतिक दिवालियापन को बेनकाब किया।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बेटी की अस्मिता, इज्जत और जीवन का सवाल हो, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। यह न्याय, इंसानियत और सामाजिक न्याय का मामला है, न कि वोटबैंक की राजनीति।” उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए टिप्पणी की कि जो पार्टी धर्म, शहीदों की शहादत और कोरोना जैसी महामारी के दर्द पर भी वोट की राजनीति करती रही, वह कांग्रेस को उपदेश देने का हकदार नहीं।
“कोरोना काल में राशन किट से लेकर चिताओं तक पर भाजपा का प्रचार चमक रहा था, आज वही लोग अंकिता के सवालों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा। दसौनी ने धामी सरकार से कई तल्ख सवाल दागे: वीआईपी को बचाने की साजिश क्यों हुई? तीन साल बाद एडिशनल एसपी द्वारा धर्मेंद्र उर्फ प्रधान को वीआईपी बताने का खुलासा क्यों? जांच प्रभावित करने वाले अधिकारी कौन थे और न्याय में देरी किसके संरक्षण में हुई?
उन्होंने मांग की है कि भाजपा आरोपों के बजाय बताए–अंकिता को न्याय कब मिलेगा, दोषियों को सजा कब होगी और सत्ता के संरक्षकों पर कार्रवाई कब? कांग्रेस नेत्री ने ऐलान किया कि जब तक अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय न मिले, उत्तराखंड कांग्रेस संघर्ष जारी रखेगी—ना झुकेगी, न चुप्पी सहेगी। यह बयान देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता में दिया गया, जहां दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे। अंकिता हत्याकांड, जो 2022 में ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में हुई बर्बरता का प्रतीक है, आज भी राज्य की राजनीति में गरमाता जा रहा है।
