“उसके हाथ में किताब थी, कंधों पर परिवार की उम्मीदें… और जेब में सिर्फ़ ₹10,000 की नौकरी” डिग्रियां हाथ में, रोजगार की आस में युवा परेशान — आखिर पढ़ाई का मूल्य क्या रह गया? उत्तराखंड क्राइम धर्म-संस्कृति राजनीति राष्ट्रीय वायरल “उसके हाथ में किताब थी, कंधों पर परिवार की उम्मीदें… और जेब में सिर्फ़ ₹10,000 की नौकरी” डिग्रियां हाथ में, रोजगार की आस में युवा परेशान — आखिर पढ़ाई का मूल्य क्या रह गया? Nazar Patrakari Ki July 21, 2026 0 डिग्रियाँ बढ़ती गईं, अवसर घटते गए: क्या देश का युवा सिर्फ सस्ती मजदूरी के लिए पढ़ रहा... Read More Read more about “उसके हाथ में किताब थी, कंधों पर परिवार की उम्मीदें… और जेब में सिर्फ़ ₹10,000 की नौकरी” डिग्रियां हाथ में, रोजगार की आस में युवा परेशान — आखिर पढ़ाई का मूल्य क्या रह गया?